"ईर्ष्या नही होती क्या मुझे?"
यही पूछा था ना तुमने ?
होती है मुझे ईर्ष्या !!
उन हवाओं से,
जो तुम्हारे बाल सहलाती हैं,
उन खुशबुओं से,
जो तुम्हारे करीब आती हैं ।
उन पत्तों से,
जो डाली से टूट कर तुम्हारे कंधों का सहारा ले सकते हैं,
उन दृश्यों से,
जो तुम्हारी जलती आंखों को कुछ सुकून दे सकते हैं ।
उस पानी से,
जो तुम्हे भिगो कर दिन भर की थकान उतार पाता है,
उस पक्षी से,
जो तुम्हारी मुंडेर पर बैठ, दो पल ही सही, एक गीत गा जाता है।
क्योंकि इनमे से हर काम मे मेरा हिस्सा हो सकता है !
और इनके आगे इंसानों से कौन भला कभी जलता है?
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1 comments:
u have dare to move in a direction to which most of us can never dream of.
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