Sunday, July 17, 2005

चाहा है सबने हमें

चाहा है सबने हमें इससे ज़्यादा तो क्या करे कोई
क़िस्मत में ना हो प्यार का मज़ा तो क्या करे कोई।

यों तो बिठा दिया है आसमाँ पर तुमने हमें
हो खुदा का और ही फ़ैसला तो क्या करे कोई।

शिक़ायत क्या करें जान दे दी लोगों ने हमपर
लेने को मेरे दम ही न हो बचा तो क्या करे कोई।

ज़माने ने तो दे ही दी तलवार हाथ में
बेबस मेरा हाथ ना उठा तो क्या करे कोई।

Friday, July 15, 2005

कल रात क्या ऐसा नहीं लगा

कल रात क्या ऐसा नहीं लगा,
कुछ कहना था और नहीं कहा?

नहीं ऐसा कि डरते थे पर
समाँ ही मानो नहीं बँधा।

समझ गए हम इतना क्या कि
कहने को कुछ नहीं बचा?

किस्से पूरी दुनिया के हैं
दासताँ अपनी गई कहाँ?

कुछ पल जो मेरे अपने हैं
सब चीज़ें उनको लें न चुरा।

कल रात क्या ऐसा नहीं लगा,
कुछ कहना था और नहीं कहा?

Sunday, July 10, 2005

अनजान थे हम पर हमें लोग जानते थे

अनजान थे हम पर हमें लोग जानते थे
नादान थे ना समझे पर लोग जानते थे।

चिंगारियो को भले ही पहचान ना पाए हम
भढ़केंगी ही वे कभी ये लोग जानते थे।

पास आए, दूर हुए, खेल समझा किए इसे
पर मिलना ही था हमें सब लोग जानते थे।

दुनिया को चौंका देंगे ये सोचा था हमने
पर सबकुछ हमसे पहले ही लोग जानते थे।

पूछते हैं लोग कि शुरुआत कहाँ हुई

पूछते हैं लोग कि शुरुआत कहाँ हुई
पहली बार उनसे दिल की बात कहाँ हुई।

किस्से जो लिख रखे लोगों ने सदियों से
वारदात उन सी हमारे साथ कहाँ हुई।

आँखे नहीं मिली, होठ नहीं हिले
किस्सा सुनाएँ तुम्हें ऐसी बात कहाँ हुई।

दुनिया डूब चुकी है, नादानियाँ तो देखो
पूछते हैं लोग कि बरसात कहाँ हुई।

Saturday, July 09, 2005

वो याद में खुश थे मेरी, रोए हम उन्हें याद कर

वो याद में खुश थे मेरी, रोए हम उन्हें याद कर
चुप रह दिल मेरे, हँसते हैं सब फ़रियाद पर।

होंगे और वो लोग जो लेते हैं दर्द में मज़ा
रोना हमें तो आ गया खुशियों की ख़ाक पर।

किया जमा बरसों से इतना कुछ कहने को
और ज़बान खुली नहीं एक भी बात पर।

लफ़्ज़ जमा कर लें हम, समाँ कैसे सँजोए
मिट गई स्याही जिससे नाम लिखा हाथ पर।

उम्र भर वो रोशनी ढूँढा किए मेरे लिए
और हम तो मिट गए थे बस एक रात पर।