कहाँ से सीखा है सताना?
यों तो आँसू पर किसी के
खुद भी रोते से दिखते हो।
दर्द बयाँ कर के दुनिया के
रोज़ नई ग़ज़ल लिखते हो।
कैसे फिर मुझको यों तुम
तड़पाते हो ये बतलाना।
कहाँ से सीखा है सताना?
नींद तुम्हें तो आ जाती है,
रातों में सपनों के साथ।
कहीं भी तो होता नहीं
पास मेरे तुम्हारा हाथ।
क्या टोना करते हो लेकिन
काम जिसका मुझको जगाना?
कहाँ से सीखा है सताना?
Tuesday, July 05, 2005
भूल गए वो मुझको ही
भूल गए वो मुझको ही, यादों को मेरी साथ लिए
धुंधला हो गया चेहरा मेरा, हाथों में जब हाथ लिए।
कब तक मन बहलाए कोई, चंद पलों की बातों से,
उम्र गुज़र गई ऐ गुलशन, उनसे खुलकर बात किए।
समय नहीं गुजरेगा मानों, झरने सब थम जाएँगे,
मौत नहीं आएगी उन बिन, ज़हर कोई क्या ख़ाक पिए।
इजाज़त दी थी क्यों ऐ दिल, आरजुओं को आने की,
नहीं छोड़ती अब वो दामन, कोशिश मेरे लाख किए।
धुंधला हो गया चेहरा मेरा, हाथों में जब हाथ लिए।
कब तक मन बहलाए कोई, चंद पलों की बातों से,
उम्र गुज़र गई ऐ गुलशन, उनसे खुलकर बात किए।
समय नहीं गुजरेगा मानों, झरने सब थम जाएँगे,
मौत नहीं आएगी उन बिन, ज़हर कोई क्या ख़ाक पिए।
इजाज़त दी थी क्यों ऐ दिल, आरजुओं को आने की,
नहीं छोड़ती अब वो दामन, कोशिश मेरे लाख किए।
Saturday, July 02, 2005
सब लोग कहते हैं
मुझे कहीं कुछ हो तो गया है, सब लोग कहते हैं।
क़ाबू ख़ुद पे खो तो गया है, सब लोग कहते हैं।
छिपाया तो बहुत हमने पर छिप न सका दुनिया से
कोई कल रात रो तो गया है, सब लोग कहते हैं।
कोई क़त्ल तो हुआ है, रात छींटे खून के यहाँ से
रगड़ कर कोई धो तो गया है, सब लोग कहते हैं।
फूलों की किसे तलाश, काँटों की सेज बिछा कोई
उस पर सर रख सो तो गया है, सब लोग कहते हैं।
क़ाबू ख़ुद पे खो तो गया है, सब लोग कहते हैं।
छिपाया तो बहुत हमने पर छिप न सका दुनिया से
कोई कल रात रो तो गया है, सब लोग कहते हैं।
कोई क़त्ल तो हुआ है, रात छींटे खून के यहाँ से
रगड़ कर कोई धो तो गया है, सब लोग कहते हैं।
फूलों की किसे तलाश, काँटों की सेज बिछा कोई
उस पर सर रख सो तो गया है, सब लोग कहते हैं।
Wednesday, June 29, 2005
हवा चल तो रही है
हवा चल तो रही है क्यों मेरे पास आती नहीं
हज़ार चीज़े तो हैं क्यों उनकी याद जाती नहीं।
आयी बारिश दुनिया ने की ख़ुशामदीद
गम मेरा ये क्या ये उन्हें तड़पाती नहीं।
कभी मैंने ही सजाई थी अपने हाथों से जो
क्या हुआ कि वो महफ़िल मुझे भाती नहीं?
कितनों की लगी है क़तार बता दे ऐ ख़ुदा,
दरबार में तेरे क्यों मेरी बारी आती नहीं।
हज़ार चीज़े तो हैं क्यों उनकी याद जाती नहीं।
आयी बारिश दुनिया ने की ख़ुशामदीद
गम मेरा ये क्या ये उन्हें तड़पाती नहीं।
कभी मैंने ही सजाई थी अपने हाथों से जो
क्या हुआ कि वो महफ़िल मुझे भाती नहीं?
कितनों की लगी है क़तार बता दे ऐ ख़ुदा,
दरबार में तेरे क्यों मेरी बारी आती नहीं।
Tuesday, June 28, 2005
सुहाना मौसम आ गया तुम आ सकते नहीं
सुहाना मौसम आ गया तुम आ सकते नहीं
और तुम बिन ये नज़ारे हमें भा सकते नहीं।
परिंदे भी बहलाते नहीं हमें, कहते हैं ये -
ये रोती शकल देख हम गा सकते नहीं।
साथियों ने तौबा कर ली साथ मेरे आने से -
रहती हो जाने कहाँ हम साथ आ सकते नहीं।
छोड़ दिया मेरे हाथों ने मेरा साथ, कहा -
छूना है आसमान, वहाँ हम जा सकते नहीं।
ख़्वाबों को मेरे पड़ी नसीहतों की मार -
छोड़ दे, उन्हे तेरे नसीब पा सकते नहीं।
और तुम बिन ये नज़ारे हमें भा सकते नहीं।
परिंदे भी बहलाते नहीं हमें, कहते हैं ये -
ये रोती शकल देख हम गा सकते नहीं।
साथियों ने तौबा कर ली साथ मेरे आने से -
रहती हो जाने कहाँ हम साथ आ सकते नहीं।
छोड़ दिया मेरे हाथों ने मेरा साथ, कहा -
छूना है आसमान, वहाँ हम जा सकते नहीं।
ख़्वाबों को मेरे पड़ी नसीहतों की मार -
छोड़ दे, उन्हे तेरे नसीब पा सकते नहीं।
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